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Showing posts from 2019

साई का इतिहास- अवश्य पढ़ें

रानी को नहीं पकड़ पा रहे थे अंग्रेज, साई के अब्बू बहरुद्दीन ने की थी रानी से गद्दारी  बीरगति को प्राप्त हुई रानी लक्ष्मी बाई को मरवाने वाले गद्दारो के बारे  मे इतिहास लोगों मेंअब तक यही धारणा हे कि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई  अँगरेजों से लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुई थी और यह बात सत्य भी हे  परंतु कितने लोगों को पता है कि इस विरांगन को पकड़ना अँगरेजों के लिए  दुष्कर ही नहीं बल्कि असंभव था ।  सालों से अँगरेजों के नाकमें दम करने वाली रानी को पकड़ने के लिए जब  अंग्रेजों को कुछ उपाय नहीं सुझा तब उन्होंने पुराने तरीके आजमाए । यानी कि  किसी गद्दार सैनिक की खोज जो रानी की सेना में हो और रानी के बारे में  काफी कुछ जानता हो गद्दारों का इतिहास देखें तो सिर्फ दो नाम ऐसे हें  जिन्होंने भारत के इतिहास को बदल कर रख दिया था पहला गद्दार जयचंद था जो  हिन्दू साम्राज्य के विनाश का कारण बना । पृथ्वी राज चौहान अंतिम हिन्दू  राजा थे जिनके बादआठ सौ वर्षों तक मुस्लिमों ने शासन किया दूसरा गद्दार मीर  जाफर हुआ जो बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला क...

प्रसिद्ध आरती "ॐ जय जगदीश हरे" के रचयिता कौन❓

मैनें कुछ लोगों से पूछा कि क्या उन्हें पता है कि प्रसिद्ध आरती "ॐ जय जगदीश हरे" के रचयिता कौन हैं ? एक ने जवाब दिया कि हर आरती तो पौराणिक काल से गाई जाती है ! एक ने इस आरती को वेदों का एक भाग बताया ! और एक ने कहा कि सम्भवत: इसके रचयिता अभिनेता-निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार हैं! "ॐ जय जगदीश हरे", आरती आज हर हिन्दू घर में गाई जाती है! इस आरती की तर्ज पर अन्य देवी देवताओं की आरतियाँ बन चुकी है और गाई जाती है! परंतु इस मूल आरती के रचयिता के बारे में काफी कम लोगों को पता है! इस आरती के रचयिता थे पं. श्रद्धाराम शर्मा या श्रद्धाराम फिल्लौरी। पं. श्रद्धाराम शर्मा का जन्म पंजाब के जिले जालंधर में स्थित फिल्लौर शहर में हुआ था। वे सनातन धर्म प्रचारक, ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संगीतज्ञ तथा हिन्दी और पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे! उनका विवाह सिख महिला महताब कौर के साथ हुआ था। बचपन से ही उन्हें ज्यौतिष और साहित्य के विषय में गहरी रूचि थी। उन्होनें वैसे तो किसी प्रकार की शिक्षा हासिल नहीं की थी परंतु उन्होंने सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई...

🌹हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होने लगे 🌹

क्या कभी आपने सोचा है कि हिन्दुओं में रात्रि को विवाह क्यों होने लगे हैं, जबकि हिन्दुओं में रात में शुभकार्य करना अच्छा नहीं माना जाता है ? रात को देर तक जागना और सुबह को देर तक सोने को, राक्षसी प्रवृति बताया जाता है। रात में जागने वाले को निशाचर कहते हैं। केवल तंत्र सिद्धि करने वालों को ही रात्रि में हवन यज्ञ की अनुमति है। वैसे भी प्राचीन समय से ही सनातन धर्मी हिन्दू दिन के प्रकाश में ही शुभ कार्य करने के समर्थक रहे हैं। तब हिन्दुओं में रात की विवाह की परम्परा कैसे पड़ी ? कभी हम अपने पूर्वजों के सामने यह सवाल क्यों नहीं उठाते हैं  या  स्वयं इस प्रश्न का हल क्यों नहीं खोजते हैं ? दरअसल भारत में सभी उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संस्कार दिन में ही किये जाते थे। सीता और द्रौपदी का स्वयंवर भी दिन में ही हुआ था। शिव विवाह से लेकर संयोगिता स्वयंवर (बाद में पृथ्वीराज चौहान जी द्वारा संयोगिता जी की इच्छा से उनका अपहरण) आदि सभी शुभ कार्यक्रम दिन में ही होते थे। प्राचीन काल से लेकर मुगलों के आने तक भारत में विवाह दिन में ही हुआ करते थे। मुस्लिम  आक्रमणकारियों के भ...

राम

जय जय सीताराम जी, राम शब्द का अर्थ है - रमंति इति रामः जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता है वह  राम आखिर क्या हैं ?... राम जीवन का मंत्र है। राम मृत्यु का मंत्र नहीं है। राम गति का नाम है, राम थमने, ठहरने का नाम नहीं है। सतत वितानीं राम सृष्टि की निरंतरता का नाम है।  राम, महाकाल के अधिष्ठाता, संहारक, महामृत्युंजयी शिवजी के आराध्य हैं।  शिवजी काशी में मरते व्यक्ति को(मृत व्यक्ति को नहीं) राम नाम सुनाकर भवसागर से तार देते हैं। राम एक छोटा सा प्यारा शब्द है। यह महामंत्र - शब्द ठहराव व बिखराव, भ्रम और भटकाव तथा मद व मोह के समापन का नाम है। सर्वदा कल्याणकारी शिव के हृदयाकाश में सदा विराजित राम भारतीय लोक जीवन के कण-कण में रमे हैं।  श्रीराम हमारी आस्था और अस्मिता के सर्वोत्तम प्रतीक हैं। भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम हिंदुओं के आराध्य ईश हैं। दरअसल, राम भारतीय लोक जीवन में सर्वत्र, सर्वदा एवं प्रवाहमान महाऊर्जा का नाम है। वास्तव में राम अनादि ब्रह्म ही हैं। अनेकानेक संतों ने निर्गुण राम को अपने आराध्य रूप में प्रतिष्ठित कि...

अयोध्या के बाद काशी की बात क्यों❓

क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था? औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669, को बनारस के "काशी विश्वनाथ मंदिर" तोड़ने का आदेश जारी किया था.....जिसका पालन कर अगस्त 1669, को काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था...उस आदेश की कॉपी आज भी एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में सुरक्षित रखी हुयी है। अपने बाप को कैद करने और प्यास से तड़पाने वाले आतातयी तथा धर्माध मुग़ल शासक औरंगजेब ने हिन्दुओं के श्रद्धा और आस्था के केंद्र बनारस सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों के मंदिरों को अपने शासन काल में तोड़ने और हिन्दुओं को मानसिक रूप से पराजित करने के हरसंभव प्रयास किये.....औरंगजेब के गद्दी पर आते ही लोभ और बल प्रयोग द्वारा धर्मान्तरण ने भीषण रूप धारण किया था अप्रैल 1669 में चार हिन्दू कानूनगो बरखास्त किये गये...... जिन्हे मुसलमान हो जाने पर वापिस ले लिये गया.... औरंगजेब की घोषित नीति थी 'कानूनगो बशर्ते इस्लाम' अर्थात् मुसलमान बनने पर कानूनगोई... द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है... यह स्थान शिव ...

एक और सच

💐 दुनिया का सबसे छोटा संविधान चीन का है: कोई अपराधी बचता नहीं है. सबसे भारी भरकम संविधान भारत का है: कोई अपराधी फंसता नहीं है. 💐 सरकारी राशन के दुकान पर भीड़ देखिये। हाथ में 20000 का मोबाइल लेकर 70000 के बाइक पर बैठकर 2 रुपये किलो चावल लेने आते है ये गरीब लोग। 💐 जिस देश में नसबन्दी कराने वाले को सिर्फ़ 1500₹ मिलते हों और बच्चा पैदा होने पर 6000₹ मिलते हों तो जनसंख्या कैसे नियन्त्रित होगी😍 💐एक बादशाह ने गधों को क़तार में चलता देखा तो धोबी से पूछा, "ये कैसे सीधे चलते है..?" धोबी ने जवाब दिया, "जो लाइन तोड़ता है उसे मैं सज़ा देता हूँ, बस इसलिये ये सीधे चलते हैं।" बादशाह बोला, "मेरे मुल्क में अमन क़ायम कर सकते हो..?" धोबी ने हामी भर ली। धोबी शहर आया तो बादशाह ने उसे मुन्सिफ बना दिया, और एक चोर का मुक़दमा आ गया, धोबी ने कहा चोर का हाथ काट दो। जल्लाद ने वज़ीर की तरफ देखा और धोबी के कान में बोला, "ये वज़ीर साहब का ख़ास आदमी है।" धोबी ने दोबारा कहा इसका हाथ काट दो, तो वज़ीर ने सरगोशी की कि ये अपना आदमी है ख़याल करो। इस बार धोबी ने...

राम मंदिर पर एक टिप्पणी

आत्मगौरव का मंदिर ये पोस्ट है उन सेक्युलरिज़्म का एनाकोंडा पाले महानुभावों के लिए जो SC के अयोध्या निर्णय के बाद से जले भुने ये कमेंट कर रहे है के गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक हालात का क्या... जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद युद्ध में जापान का मनोबल पूरी तरह ध्वस्त हो गया.... जापान ने मित्रराष्ट्रों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया.. जापान अब एक युद्ध में बर्बाद देश था जिसके पास अपने मारे गए लोगों की सड़ती लाशों को सम्मान सहित अंतिम विदा देने की हैसियत तक न थी.... चारों तरफ हवाई हमलों में ध्वस्त इमारतें, बीमार घायलों की चीत्कारें, भूंख, मलवा और पाताल की गहराई तक गिरा मनोबल..... अमेरिकन और मित्रराष्ट्रों की सेना के कमांडर डगलस मेकआर्थर की दया पर जीता सांस लेता एक मुल्क जापान.... मित्रराष्ट्रों ने जापान को फिर खड़ा करने की योजनाएं बनाई जापानी भी पुनः अपने जीवन को जीने का प्रयत्न करने लगे लेकिन क्या टूटे मनोबल से कोई राष्ट्र कोई कौम जी सकती है.... सायद नहीं!! ऐसे में जापान के राजा हिरोहितो ने एक बेहद विवादित निर्णय लिया...... निर्णय था यासुकुनी श्राइन के पुनःनिर्म...

सच्चाई डंके की चोट पर

हां तो अब भी किसी को जानना है कि मोदी/योगी/भाजपा ने हिंदुत्व के लिए क्या किया है ? प्राचीन शहर अयोध्या को तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। अयोध्या में तीर्थ विकास परिषद की स्थापना की जाएगी, जिसे राज्य के साथ शहर को विकसित करने का काम सौंपा जाएगा। पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार होगा।  अयोध्या में विकास योजनाओं का रोडमैप : 📌 केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक, नई अयोध्या के विकास की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी को दी गई है।  📌 नई अयोध्या के आधुनिकीकरण की योजना में शहर में राम संग्रहालय खोलने की भी योजना है। इसमें खुदाई के समय ASI द्वारा पाए गए कलाकृतियों और पुरावशेष को यहां प्रदर्शित किया जाएगा।  📌 अयोध्या तीर्थ विकास परिषद की स्थापना का प्रस्ताव अयोध्या तीर्थ विकास परिषद पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे एक आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए काम करेगी। 📌 अयोध्या में भगवान राम को समर्पित दस द्वार स्थापित किए जाएंगे। 📌 अयोध्या में एक हवाई अड्डे का निर्माण किया जा रहा है, मई 2020 तक अयोध्या आने और जाने वाली प...

वाद - विवाद

मनु स्मृति के अनुसार,इन पंद्रह लोगों के साथ कभी वाद-विवाद नहीं करना चाहिए!!!!!! ऋत्विक्पुरोहिताचार्यैर्मातुलातिथिसंश्रितैः। बालवृद्धातुरैर्वैधैर्ज्ञातिसम्बन्धिबांन्धवैः।। मातापितृभ्यां यामीभिर्भ्रात्रा पुत्रेण भार्यया। दुहित्रा दासवर्गेण विवादं न समाचरेत्।। अर्थात्  : - यज्ञकरने,वाले,पुरोहित,आचार्य,अतिथियों,माता,पिता,मामा आदि।संबंधियों,भाई,बहन,पुत्र,पुत्री,पत्नी,पुत्रवधू,दामाद तथा,गृह सेवकों यानी नौकरों से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। यज्ञ करने वाला : - यज्ञ करने वाला ब्राह्मण सदैव सम्मान करने योग्य होता है। यदि उससे किसी प्रकार की कोई चूक हो जाए तो भी उसके साथ कभी वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। यदि आप ऐसा करेंगे तो इससे आपकी प्रतिष्ठा ही धूमिल होगी। अतः यज्ञ करने वाले वाले ब्राह्मण से वाद-विवाद न करने में ही भलाई है।_ पुरोहित : - यज्ञ, पूजन आदि धार्मिक कार्यों को संपन्न करने के लिए एक योग्य व विद्वान ब्राह्मण को नियुक्त किया जाता है, जिसे पुरोहित कहा जाता है। भूल कर भी कभी पुरोहित से विवाद नहीं करना चाहिए। पुरोहित के माध्यम से ही पूजन आदि शुभ कार्य संपन्न होते हैं, जिसका पुण...

आओ लौट चले भारत की ओर

मैं समय हूँ AM और PM संस्कृत से चुराया गया शब्द है  हमे बचपन से ये रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दो A.M. और P.M. का मतलब होता है। A.M. : एंटी मेरिडियन (ante meridian) P.M. : पोस्ट मेरिडियन (post meridian) एंटी यानि पहले, लेकिन किसके ? और पोस्ट यानि बाद में, लेकिन फिर वही सवाल, किसके ?  ये कभी साफ नही किया गया क्योंकि ये चुराय गये शब्द का लघुतम रूप था ""किसके = जहां कारक खुद गौण है"" हमारे प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियो में उड़ा दिया और अब, सबकुछ साफ साफ दृष्टिगत है कैसे ? देखिये .... A.M. = आरोहनम मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya P.M. = पतनम मार्तण्डस्य Patanam Martandasya सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया, कैसे गौण किया ये सोचनीय है और बेतुका भी। भ्रम इसलिये पैदा होता है कि अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नही इंगित करते जो कि वास्तविक में है। आरोहणम्_मार्तडस्य् Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव) और  पतनम्_मार्तडस्य् Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ...

गायत्री निवास

क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति, एक मार्मिक कहानी जो किसी ने भेजी थी , मुझे लगा कि इसे प्रचारित किया जाना भारतीय संस्कृति को बचाये रखनें के लिए आवश्यक हैं .....             गायत्री निवास बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई. सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी. शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर एक पेड़ की ओट में खड़ी बुढ़िया पर ठहर गईं. ‘ओह! फिर वही बुढ़िया, क्यों इस तरह से उसके घर की ओर ताकती है?’ शालू की उदासी बेचैनी में तब्दील हो गई, मन में शंकाएं पनपने लगीं. इससे पहले भी शालू उस बुढ़िया को तीन-चार बार नोटिस कर चुकी थी. दो महीने हो गए थे शालू को पूना से गुड़गांव शिफ्ट हुए, मगर अभी तक एडजस्ट नहीं हो पाई थी. पति सुधीर का बड़े ही शॉर्ट नोटिस पर तबादला हुआ था, वो तो आते ही अपने काम और ऑफ़िशियल टूर में व्यस्त हो गए. छोटी शैली का तो पहली क्लास में आराम से एडमिशन ह...

एक कदम ईश्वर की ओर भाग 1

एक गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है।  वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगी। वह बाघ भी उसके पीछे दौड़ने लगा। दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया। घबराई हुई गाय उस तालाब के अंदर घुस गई।  वह बाघ भी उसका पीछा करते हुए तालाब के अंदर घुस गया। तब उन्होंने देखा कि वह तालाब बहुत गहरा नहीं था। उसमें पानी कम था और वह कीचड़ से भरा हुआ था।  उन दोनों के बीच की दूरी काफी कम  थी। लेकिन अब वह कुछ नहीं कर पा रहे थे। वह गाय उस कीचड़ के अंदर धीरे-धीरे धंसने लगी। वह बाघ भी उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं सका। वह भी धीरे-धीरे कीचड़ के अंदर धंसने लगा। दोनों ही करीब करीब गले तक उस कीचड़ के अंदर फंस गए।  दोनों हिल भी नहीं पा रहे थे। गाय के करीब होने के बावजूद वह बाघ उसे पकड़ नहीं पा रहा था।  थोड़ी देर बाद गाय ने उस बाघ से पूछा, क्या तुम्हारा कोई गुरु या मालिक है?  बाघ ने गुर्राते हुए कहा, मैं तो जंगल का राजा हूं। मेरा कोई मालिक नहीं। मैं खुद ही जंगल का मालिक हूं।  गाय ने कहा, लेकिन तु...

ईद की सफाई

एक मियां अकबर थे उसकी दोस्ती सुंदर बेगम से फेसबुक पर हो गयी। गुड मॉर्निंग, nice pic , wow, से आगे कुछ बातें इनबॉक्स में भी होने लगी। मियां अकबर खुश रहने लगे। रोज़ इधर उधर से फेसबुकिया फूल भेज देते। एक दिन उनके मन की हो गयी। इनबॉक्स में नंबर मांग लिया बेगम ने। अब क्या था। व्हाट्सअप शुरू। जनाब रोमांटिक मैसेज भेजने लगे। अरे फेसबुक पर लड़की आपकी पोस्ट लाइक भर कर ले तो आप स्वयं को शाहरुख खान के अवतार समझने लगते हो। और अगर फ्रेंड रिक्वेस्ट आ जाये तो कहना ही क्या। खैर, एक दिन बेगम ने फ़ोन लगा लिया। जल्दी आ जाओ। "मेरे शौहर बाहर गए हैं"। जनाब बिजली की स्पीड से पहुंच गए। बात शुरू होती, तो अचानक होश आया। "तुम्हारे शौहर आ गए तो" "नहीं आएंगे, और आ जाएं तो तुम कालीन साफ करने लगना, थोड़ी देर में चले जायेंगे। वरना टेबल , पंखे साफ करते रहना" ये बात चल ही रही थी, की डोर बेल बज गई। शौहर आ गए। जनाब घबरा कर अपना रुमाल निकाल कर टेबल साफ करने लगे। बेगम ने झाड़ू , फटका, डस्टर , वाइपर ला कर पटक दिया। "लो साफ करो" शौहर ने "पूछा कौन है ये।...

राष्ट्र योद्धा सरदार मोहन सिंह

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सरदार मोहन सिंह ये हैं सरदार मोहन सिंह, जिन्होने द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन के लिए लड़ाई लड़ी थी ।  युद्ध जीतने के बाद हिटलर ने उन्हें इनाम देना चाहा तो सरदार जी ने कहा कि हमें अच्छे से अच्छे हथियार दीजिए, क्योंकि हमें अपने देश को आजाद करवाना है । हिटलर ने फिर उन्हें जो हथियार दिये , वही हथियार आजाद हिन्द फौज ने इस्तेमाल किए और सही मायने मे देखा जाए तो, इस लड़ाई में र॔गून में 50 हजार से ज्यादा अंग्रेजी फौज के मारे जाने के बाद ही अंग्रेजो ने भारत छोड़ने का फैसला लिया था ।  बाद में आजादी का सारा श्रेय चरखे को दिया । सरदार मोहन सिंह जैसे महान योद्धा का नाम भारत के इतिहास से गायब ही कर दिया गया । स्वतंत्र भारत में वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 1989 में उन्होंने अपना पार्थिव शरीर छोड़ दिया।

नाथूराम गोडसे की अंतिम जुबानी

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने पर प्रकाशित किया गया  60 साल तक भारत में प्रतिबंधित रहा नाथूराम गोडसे  का अंतिम भाषण -                       मैंने गांधी को  क्यों मारा ! 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुए बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया  नाथूराम गोड़से समेत 17 देशभक्तों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान  न्यायमूर्ति खोसला  से नाथूराम जी ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था पर यह कोर्ट परिसर तक ही सिमित रह गयी क्योकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया l                 ...