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जागो हिन्दू जागो

मैं चिंतित हूं...!  क्योंकि अधिकांश हिंदुओं को लगता है कि उनकी मेहनत की कमाई, परिसंपत्ति, संवैधानिक अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता क्योंकि उन्हें लगता है कि जब उनकी नज़र किसी दूसरी कौम की संपत्ति, धर्म, इज्जत पर नहीं है तो दूसरों की भी उन पर नहीं होगी।  वज़ह, उन्होंनेे इस्लामिक इतिहास को समझा नहीं है। यह बिल्कुल कबूतर और बिल्ली के किस्से जैसा ही है और जिस नासमझी कि कीमत हमेशा कबूतर को अपनी जान से चुकानी पड़ती है।  हिन्दुओं की इतिहास से तो छोड़ो, हाल ही के कश्मीर के घटनाक्रम से भी कोई सीख न लेने से वे देश के अनेक हिस्सों से खदेड़े जा रहे हैं। जो इतिहास से सबक नहीं सीखता वहां इतिहास खुद को बारंबार दोहराता है। ज़रा बानगी देखिए... -एक दिन पूरे काबुल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों का था, आज उस पर तालिबानों का कब्ज़ा है | -सत्तर साल पहले पूरा सिंध, सिंधियों का था, आज उनकी पूरी धन-संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है | -एक दिन पूरा कश्मीर धन-धान्य और ऐश्वर्य से पूर्ण हिन्दुओंं का था, आज उन महलों और सेव के बागों पर आतंक का कब्ज़ा हो गया और उन्हें मिला दिल्ली में दस बाय...

क्या UPSC तैयार कर रहा है मुस्लिम IAS की फौज ❓

चौकानें वाला खुलासा , मोदी सरकार को झेलना होगा भारी विरोध वर्ना 🏹 देश के लिए बहुत खतरनाक संकेत  भविष्य के लिए खतरा जानिए पूरा सच  IAS के एग्जाम में अचानक मुसलमानों की बाढ़ क्यो आ गयी है.... कड़वा सच पिछले 4-5 सालों(2015) से कश्मीरी मुस्लिम युवक UPSC में बहुत सेलेक्ट हो रहें , इसका कारण जानना चाहा , कश्मीरी ही नहीं बल्कि पूरे भारत से मुस्लिम युवक भी बड़ी मात्रा में upsc की बाजी मार रहें पहले इनका चयन % कम था । आप इसमें एक पैटर्न देखेंगे बस मेरी बात सावधानी से समझने की कोशिश करियेगा जो मुस्लिम उर्दू साहित्य mains में रखेगा जाहिर है हिन्दू उर्दू नही पढ़ते उन्हें जाँचने वाला भी मुस्लिम ही होगा और वो चाहेगा उसकी कौम का बन्दा अधिकारी बने ताकि बाद में प्रेशर ग्रुप बना सकें पूरी सरकार पे ,ये उर्दू सेIAS,ओर UPSC जैसी परीक्षाओं में मुस्लिम और कश्मीरी युवकों को देश के उच्च पदों पर बिठाने की साज़िश है जिस से जब भी हिन्दू मुस्लिम गृह युद्ध हो ये कट्टर मुल्ले अपनी कोम का साथ दे और ओवेसी जैसे लोग इन को आसानी से अपने कब्जे में कर सके  अभी आप देखेंगे तो mains में आप उर्दू ही...

अयोध्या के बाद काशी की बात क्यों❓

क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था? औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669, को बनारस के "काशी विश्वनाथ मंदिर" तोड़ने का आदेश जारी किया था.....जिसका पालन कर अगस्त 1669, को काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था...उस आदेश की कॉपी आज भी एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में सुरक्षित रखी हुयी है। अपने बाप को कैद करने और प्यास से तड़पाने वाले आतातयी तथा धर्माध मुग़ल शासक औरंगजेब ने हिन्दुओं के श्रद्धा और आस्था के केंद्र बनारस सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों के मंदिरों को अपने शासन काल में तोड़ने और हिन्दुओं को मानसिक रूप से पराजित करने के हरसंभव प्रयास किये.....औरंगजेब के गद्दी पर आते ही लोभ और बल प्रयोग द्वारा धर्मान्तरण ने भीषण रूप धारण किया था अप्रैल 1669 में चार हिन्दू कानूनगो बरखास्त किये गये...... जिन्हे मुसलमान हो जाने पर वापिस ले लिये गया.... औरंगजेब की घोषित नीति थी 'कानूनगो बशर्ते इस्लाम' अर्थात् मुसलमान बनने पर कानूनगोई... द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है... यह स्थान शिव ...

गायत्री निवास

क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति, एक मार्मिक कहानी जो किसी ने भेजी थी , मुझे लगा कि इसे प्रचारित किया जाना भारतीय संस्कृति को बचाये रखनें के लिए आवश्यक हैं .....             गायत्री निवास बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई. सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी. शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर एक पेड़ की ओट में खड़ी बुढ़िया पर ठहर गईं. ‘ओह! फिर वही बुढ़िया, क्यों इस तरह से उसके घर की ओर ताकती है?’ शालू की उदासी बेचैनी में तब्दील हो गई, मन में शंकाएं पनपने लगीं. इससे पहले भी शालू उस बुढ़िया को तीन-चार बार नोटिस कर चुकी थी. दो महीने हो गए थे शालू को पूना से गुड़गांव शिफ्ट हुए, मगर अभी तक एडजस्ट नहीं हो पाई थी. पति सुधीर का बड़े ही शॉर्ट नोटिस पर तबादला हुआ था, वो तो आते ही अपने काम और ऑफ़िशियल टूर में व्यस्त हो गए. छोटी शैली का तो पहली क्लास में आराम से एडमिशन ह...

एक कदम ईश्वर की ओर भाग 1

एक गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है।  वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगी। वह बाघ भी उसके पीछे दौड़ने लगा। दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया। घबराई हुई गाय उस तालाब के अंदर घुस गई।  वह बाघ भी उसका पीछा करते हुए तालाब के अंदर घुस गया। तब उन्होंने देखा कि वह तालाब बहुत गहरा नहीं था। उसमें पानी कम था और वह कीचड़ से भरा हुआ था।  उन दोनों के बीच की दूरी काफी कम  थी। लेकिन अब वह कुछ नहीं कर पा रहे थे। वह गाय उस कीचड़ के अंदर धीरे-धीरे धंसने लगी। वह बाघ भी उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं सका। वह भी धीरे-धीरे कीचड़ के अंदर धंसने लगा। दोनों ही करीब करीब गले तक उस कीचड़ के अंदर फंस गए।  दोनों हिल भी नहीं पा रहे थे। गाय के करीब होने के बावजूद वह बाघ उसे पकड़ नहीं पा रहा था।  थोड़ी देर बाद गाय ने उस बाघ से पूछा, क्या तुम्हारा कोई गुरु या मालिक है?  बाघ ने गुर्राते हुए कहा, मैं तो जंगल का राजा हूं। मेरा कोई मालिक नहीं। मैं खुद ही जंगल का मालिक हूं।  गाय ने कहा, लेकिन तु...

आज धर्मी एवं अधर्मी दोनों के लिए Zomato एक बड़ा खतरा क्यों बन गया है ❓आप भी जानें।

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Zomato की कहानी ट्विटर से घूम कर फेसबुक पर आ गयी. उसमें भोजन के धर्म का प्रश्न उठाया गया है।   अभी तक अमेज़न को पैसा दिया अब अमेज़न से पैसा लेना शुरू करें   एक हिन्दू ने एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय के हाथ से डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया और अपना आर्डर कैंसिल करा दिया। Zomato ने अपनी पीठ थपथपाते हुए शाबाशी लूटने की कोशिश की कि भोजन का कोई धर्म नहीं होता..एक कस्टमर की कमी बर्दाश्त की जाएगी।       हम हिंदुओं का इस विषय पर गुस्सा यह निकल कर आ रहा है कि एक मुस्लिम की हलाल मीट नहीं होने की शिकायत को तो गम्भीरता से लिया गया, पर हिन्दू की धार्मिक कंसीडरेशन की शिकायत को ना सिर्फ नकार दिया गया, बल्कि उसे अपनी पीठ थपथपाने का अवसर भी बना लिया गया। क्यों❓ हमारी आपत्तियों में वह दम क्यों नहीं होता जो एक मुस्लिम की आपत्ति में होता है❓    पहली बात तो यह कि एक हिन्दू की आपत्ति एक व्यक्ति की आपत्ति है जबकि एक मुसलमान की आपत्ति पूरे समुदाय की आपत्ति है. उसमें एक कंसिस्टेंसी है। जो एक मुस्लिम की आपत्ति होगी वही दूसरे मुस्लिम की भी होगी। और यह आपत्ति किसी एक दिन की...