राम मंदिर पर एक टिप्पणी

आत्मगौरव का मंदिर

ये पोस्ट है उन सेक्युलरिज़्म का एनाकोंडा पाले महानुभावों के लिए जो SC के अयोध्या निर्णय के बाद से जले भुने ये कमेंट कर रहे है के गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक हालात का क्या...

जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद युद्ध में जापान का मनोबल पूरी तरह ध्वस्त हो गया.... जापान ने मित्रराष्ट्रों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया..
जापान अब एक युद्ध में बर्बाद देश था जिसके पास अपने मारे गए लोगों की सड़ती लाशों को सम्मान सहित अंतिम विदा देने की हैसियत तक न थी.... चारों तरफ हवाई हमलों में ध्वस्त इमारतें, बीमार घायलों की चीत्कारें, भूंख, मलवा और पाताल की गहराई तक गिरा मनोबल..... अमेरिकन और मित्रराष्ट्रों की सेना के कमांडर डगलस मेकआर्थर की दया पर जीता सांस लेता एक मुल्क जापान....

मित्रराष्ट्रों ने जापान को फिर खड़ा करने की योजनाएं बनाई जापानी भी पुनः अपने जीवन को जीने का प्रयत्न करने लगे लेकिन क्या टूटे मनोबल से कोई राष्ट्र कोई कौम जी सकती है.... सायद नहीं!!

ऐसे में जापान के राजा हिरोहितो ने एक बेहद विवादित निर्णय लिया...... निर्णय था यासुकुनी श्राइन के पुनःनिर्माण और विस्तार का....
आज के टोक्यो के कुछ मुख्य पर्यटन केंद्रों में से एक यासुकुनी श्राइन का निर्माण दरअसल 1869 में बोसिन वॉर में जापान के लिए बलिदान देने वालों की याद में किया गया था... यहाँ इन बलिदानियों के नाम दर्ज किए गए थे 
लेकिन दूसरे युद्ध में ये मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था....... युद्ध के बाद जापान ने इसका पुनःनिर्माण चालू किया और तमाम दबाव को दरकिनार रख इसे भव्यता के साथ पूरा किया...... मित्रराष्ट्रों के भारी विरोध के बाद भी जापान ने इस मंदिर में दूसरे युद्ध में जापान के लिए बलिदान हुए योद्धाओं के नाम दर्ज किए और तो और उन चीनी, कोरियाई, भारतीय सहयोगियों के भी नाम दर्ज किए जो युद्ध में जापान के पक्ष में सेवाएं देते वीरगति को प्राप्त हुए....

जनरल आर्थर ने जापान को चेताया पर जापान नहीं रुका...... बर्बाद, घुटनों पर पड़ा जापान नहीं माना उसने 1951 में उन चौदह जापानी जनरल के नाम भी यहां शामिल किए जिन्ह युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फाँसी पर लटकाया था..... 

जब खेत, खलिहान, उधोग व्यापार, सब बर्बाद थे..... जापान एक मंदिर बनाने के लिए जिद कर रहा था क्यों भला??
लोग भुंखो मर रहे थे, बीमारियां फैल रहीं थी, बच्चे कुपोषण का शिकार थे...... जापान युद्ध स्मारक बना रहा था और इसके लिए वो हदें भी तोड़ रहा था
दरअसल जापान के राजा ने समर्पण के सिर्फ 5 साल के भीतर ही जापान को एक बड़ी चीज इस मंदिर के साथ बनाकर देदी, मज़बूती से जापानियों के सामने खड़ी कर दी..... और वो था जापानियों का ध्वस्त हो चुका आत्मगौरव, दुनियाँ में जापान के श्रेष्ठ होने भाव इसने पुनः जगा दिया.....

इसके बाद जो यात्रा सुरु हुई इतनी विभीषिका झेल चुका जापान जापानियों के आत्मबल के साथ सिर्फ तीन दसक के भीतर दोबारा दुनियाँ के आगे छाती तान खड़ा हो गया....!

कल अयोध्या फैसले ने हिन्दू को क्या दिया ये सिर्फ एक स्वाभिमानी हिन्दू ही समझ सकता है, और राम मंदिर आने वाले समय में भारत को क्या देगा ये आप यासुकुनी श्राइन से समझ सकते हैं...... एक आत्मगौरव से लबरेज़ कौम कोई भी लक्ष्य भेदने की ताकत रखती है..... और उसी आत्मगौरव को जापान में यासुकुनी श्राइन कहा जाता है और हिन्द में राम मंदिर!!!

जय श्री राम

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