Posts

Showing posts with the label सेवा

The Kashmir Files

Image
 TheKashmirFiles!  विवेक बाबू दिल चीरकर कोई रखता है क्या? आपने कश्मीर के दर्द को सुना नहीं है बल्कि उसके सीने से दर्द बाहर खींच लिया है। जो पिछले 30 सालों से दफन था।  कश्मीर की उस काली रात के रहस्य व कश्मीरी पंडितों के दर्द को लेखक-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपने सहयोगी लेखक सौरभ एम पांडे के साथ मिलकर झंकझोर देने वाला और सच को खींचकर बाहर लाने वाली स्क्रिप्ट व स्क्रीन प्ले दिया है। हर फ्रेम चीख रही है। सीधे दिल से कनेक्ट कर रही है। विवेक की कहानी कृष्णा पंडित को केंद्र में रखकर कश्मीर जाती है और ब्रह्म दत्त, विष्णु राम, डीजीपी हरि नरेन, डॉक्टर, राधिका मेनन आदि महत्वपूर्ण किरदारों को उठाती है। इत्मीनान से पुष्कर पंडित को सुनती है। इतने सालों से दफन तर्क व असल सच को पटक कर रख देती है।  पुष्कर पंडित की सच्चाई का अंत इतना भयावह है कि कमज़ोर दिल वाले दर्शक आँखें बंद कर लेंगे। देखा न जाएगा।  विवेक ने जनवरी 1990 से अगस्त 2019 तक के सफर को अच्छे से समेटा है। उनकी कहानी वर्तमान और अतीत में कैद कश्मीरी पंडितों के अश्रुओं की 'डल' में गोते लगाती निकलती है। विवेक ने कहानी ...

गायत्री निवास

क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति, एक मार्मिक कहानी जो किसी ने भेजी थी , मुझे लगा कि इसे प्रचारित किया जाना भारतीय संस्कृति को बचाये रखनें के लिए आवश्यक हैं .....             गायत्री निवास बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई. सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी. शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर एक पेड़ की ओट में खड़ी बुढ़िया पर ठहर गईं. ‘ओह! फिर वही बुढ़िया, क्यों इस तरह से उसके घर की ओर ताकती है?’ शालू की उदासी बेचैनी में तब्दील हो गई, मन में शंकाएं पनपने लगीं. इससे पहले भी शालू उस बुढ़िया को तीन-चार बार नोटिस कर चुकी थी. दो महीने हो गए थे शालू को पूना से गुड़गांव शिफ्ट हुए, मगर अभी तक एडजस्ट नहीं हो पाई थी. पति सुधीर का बड़े ही शॉर्ट नोटिस पर तबादला हुआ था, वो तो आते ही अपने काम और ऑफ़िशियल टूर में व्यस्त हो गए. छोटी शैली का तो पहली क्लास में आराम से एडमिशन ह...