छपाक
"छपाक" - नदीम सैयद के धर्म-परिवर्तन की कहानी
टुकड़े-टुकड़े गैंग समर्थक दीपिका-पादुकोण अभिनीत फिल्म छपाक एक एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल की सच्ची कहानी पर आधारित है ।
15 वर्षीय लक्ष्मी अग्रवाल पर यह एसिड अटैक दिल्ली के खान मार्केट क्षेत्र में सन 2005 में हुआ था जब वह अपनी म्यूजिक क्लास के बाद घर वापस लौट रही थीं ।
उन पर एसिड अटैक करने वाले व्यक्ति का नाम "नदीम सैयद" था ।
15 वर्ष की नाबालिक मासूम बालिका लक्ष्मी अग्रवाल की उम्र से दोगुने से भी अधिक उम्र के नदीम सैयद ने उन पर यह एसिड अटैक इसलिए किया था कि लक्ष्मी ने उसकी छेड़छाड़ और एकतरफा प्रेम प्रस्ताव के सामने झुकने से मना कर दिया था ।
लेकिन फिल्म छपाक में लक्ष्मी अग्रवाल पर एसिड अटैक करने वाले व्यक्ति का नाम "नदीम सैयद" ना रखकर "राजेश" रखा गया है ।
है ना कमाल का धर्म परिवर्तन?
दाऊदवुड या मौलावुड में नेरेटिव ऐसे ही सेट किए जाते हैं, मजहबी कुकर्मों पर ऐसे ही पर्दा डाला जाता है ।
कल को यदि "ओसामा-बिन-लादेन"पर फिल्म बनाएंगे तो उसका नाम "ओम-बिहारी-पांडे" रखेंगे ।
टुकड़े-टुकड़े गैंग समर्थक दीपिका-पादुकोण अभिनीत फिल्म छपाक एक एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल की सच्ची कहानी पर आधारित है ।
15 वर्षीय लक्ष्मी अग्रवाल पर यह एसिड अटैक दिल्ली के खान मार्केट क्षेत्र में सन 2005 में हुआ था जब वह अपनी म्यूजिक क्लास के बाद घर वापस लौट रही थीं ।
उन पर एसिड अटैक करने वाले व्यक्ति का नाम "नदीम सैयद" था ।
15 वर्ष की नाबालिक मासूम बालिका लक्ष्मी अग्रवाल की उम्र से दोगुने से भी अधिक उम्र के नदीम सैयद ने उन पर यह एसिड अटैक इसलिए किया था कि लक्ष्मी ने उसकी छेड़छाड़ और एकतरफा प्रेम प्रस्ताव के सामने झुकने से मना कर दिया था ।
लेकिन फिल्म छपाक में लक्ष्मी अग्रवाल पर एसिड अटैक करने वाले व्यक्ति का नाम "नदीम सैयद" ना रखकर "राजेश" रखा गया है ।
है ना कमाल का धर्म परिवर्तन?
दाऊदवुड या मौलावुड में नेरेटिव ऐसे ही सेट किए जाते हैं, मजहबी कुकर्मों पर ऐसे ही पर्दा डाला जाता है ।
कल को यदि "ओसामा-बिन-लादेन"पर फिल्म बनाएंगे तो उसका नाम "ओम-बिहारी-पांडे" रखेंगे ।
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