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ईद की सफाई

एक मियां अकबर थे उसकी दोस्ती सुंदर बेगम से फेसबुक पर हो गयी। गुड मॉर्निंग, nice pic , wow, से आगे कुछ बातें इनबॉक्स में भी होने लगी। मियां अकबर खुश रहने लगे। रोज़ इधर उधर से फेसबुकिया फूल भेज देते। एक दिन उनके मन की हो गयी। इनबॉक्स में नंबर मांग लिया बेगम ने। अब क्या था। व्हाट्सअप शुरू। जनाब रोमांटिक मैसेज भेजने लगे। अरे फेसबुक पर लड़की आपकी पोस्ट लाइक भर कर ले तो आप स्वयं को शाहरुख खान के अवतार समझने लगते हो। और अगर फ्रेंड रिक्वेस्ट आ जाये तो कहना ही क्या। खैर, एक दिन बेगम ने फ़ोन लगा लिया। जल्दी आ जाओ। "मेरे शौहर बाहर गए हैं"। जनाब बिजली की स्पीड से पहुंच गए। बात शुरू होती, तो अचानक होश आया। "तुम्हारे शौहर आ गए तो" "नहीं आएंगे, और आ जाएं तो तुम कालीन साफ करने लगना, थोड़ी देर में चले जायेंगे। वरना टेबल , पंखे साफ करते रहना" ये बात चल ही रही थी, की डोर बेल बज गई। शौहर आ गए। जनाब घबरा कर अपना रुमाल निकाल कर टेबल साफ करने लगे। बेगम ने झाड़ू , फटका, डस्टर , वाइपर ला कर पटक दिया। "लो साफ करो" शौहर ने "पूछा कौन है ये।...

राष्ट्र योद्धा सरदार मोहन सिंह

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सरदार मोहन सिंह ये हैं सरदार मोहन सिंह, जिन्होने द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन के लिए लड़ाई लड़ी थी ।  युद्ध जीतने के बाद हिटलर ने उन्हें इनाम देना चाहा तो सरदार जी ने कहा कि हमें अच्छे से अच्छे हथियार दीजिए, क्योंकि हमें अपने देश को आजाद करवाना है । हिटलर ने फिर उन्हें जो हथियार दिये , वही हथियार आजाद हिन्द फौज ने इस्तेमाल किए और सही मायने मे देखा जाए तो, इस लड़ाई में र॔गून में 50 हजार से ज्यादा अंग्रेजी फौज के मारे जाने के बाद ही अंग्रेजो ने भारत छोड़ने का फैसला लिया था ।  बाद में आजादी का सारा श्रेय चरखे को दिया । सरदार मोहन सिंह जैसे महान योद्धा का नाम भारत के इतिहास से गायब ही कर दिया गया । स्वतंत्र भारत में वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 1989 में उन्होंने अपना पार्थिव शरीर छोड़ दिया।

नाथूराम गोडसे की अंतिम जुबानी

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने पर प्रकाशित किया गया  60 साल तक भारत में प्रतिबंधित रहा नाथूराम गोडसे  का अंतिम भाषण -                       मैंने गांधी को  क्यों मारा ! 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुए बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया  नाथूराम गोड़से समेत 17 देशभक्तों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान  न्यायमूर्ति खोसला  से नाथूराम जी ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था पर यह कोर्ट परिसर तक ही सिमित रह गयी क्योकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया l                 ...

भारत की GDP को समझें

ये जीडीपी क्या है? सरल भाषा मे समझते हैं। ये GDP क्या बला है ?? 100%सच श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान के कुछ अंश जब आप टूथपेस्ट खरीदते हैं तो GDP बढ़ती है परंतु किसी गरीब से दातुन खरीदते हैं तो GDP नहीं बढ़ती। 100% सच- जब आप किसी बड़े होस्पीटल मे जाकर 500 रुपे की दवाई खरीदते हैं तो GDP बढ़ती है परंतु आप अपने घर मे उत्पन्न गिलोय नीम या गोमूत्र से अपना इलाज करते हैं तो जीडीपी नहीं बढ़ती। 100% सच जब आप घर मे गाय पालकर दूध पीते हैं तो GDP नहीं बढ़ती परंतु पैकिंग का मिलावट वाला दूध पीते हैं तो GDP बढ़ती है। 100% सच जब आप अपने घर मे सब्जिया उगा कर खाते हैं तो GDP नहीं बढ़ती परंतु जब किसी बड़े AC माल मे जाकर 10 दिन की बासी सब्जी खरीदते हैं तो GDP बढ़ती है। 100% सच जब आप गाय माता की सेवा करते हैं तो GDP नहीं बढ़ती परंतु जब कसाई उसी गाय को काट कर चमड़ा मांस बेचते हैं तो GDP बढ़ती है। रोजाना अखबार लिखा होता है कि भारत की जीडीपी 8 .7 % है कभी कहा जाता है के 9 % है ; प्रधानमंत्री कहते है की हम 12 % जीडीपी हासिल कर सकते है पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलम कहते थे की हम 14 % भी कर सकते है , रोजान...

आज धर्मी एवं अधर्मी दोनों के लिए Zomato एक बड़ा खतरा क्यों बन गया है ❓आप भी जानें।

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Zomato की कहानी ट्विटर से घूम कर फेसबुक पर आ गयी. उसमें भोजन के धर्म का प्रश्न उठाया गया है।   अभी तक अमेज़न को पैसा दिया अब अमेज़न से पैसा लेना शुरू करें   एक हिन्दू ने एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय के हाथ से डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया और अपना आर्डर कैंसिल करा दिया। Zomato ने अपनी पीठ थपथपाते हुए शाबाशी लूटने की कोशिश की कि भोजन का कोई धर्म नहीं होता..एक कस्टमर की कमी बर्दाश्त की जाएगी।       हम हिंदुओं का इस विषय पर गुस्सा यह निकल कर आ रहा है कि एक मुस्लिम की हलाल मीट नहीं होने की शिकायत को तो गम्भीरता से लिया गया, पर हिन्दू की धार्मिक कंसीडरेशन की शिकायत को ना सिर्फ नकार दिया गया, बल्कि उसे अपनी पीठ थपथपाने का अवसर भी बना लिया गया। क्यों❓ हमारी आपत्तियों में वह दम क्यों नहीं होता जो एक मुस्लिम की आपत्ति में होता है❓    पहली बात तो यह कि एक हिन्दू की आपत्ति एक व्यक्ति की आपत्ति है जबकि एक मुसलमान की आपत्ति पूरे समुदाय की आपत्ति है. उसमें एक कंसिस्टेंसी है। जो एक मुस्लिम की आपत्ति होगी वही दूसरे मुस्लिम की भी होगी। और यह आपत्ति किसी एक दिन की...

क्या हिन्दू होना गलत है❓

सेवा में,  आदरणीय प्रधानमंत्री जी नमस्कार !!! विषय -- मुसलमानों द्वारा हिंदूओं के साथ किए गये माब लिचिंग पर महोदय, अभी कुछ दिन पहले आपके पास असहिष्णुता गैंग ( शहरी नक्सलीयों ) के 49 सदस्यों के समुह का एक पत्र पहुंचा है. शहरी नक्सलीयों द्वारा पत्र लिखने के पीछे बहुत ही सोची-समझी साजिश है जिसके तीन प्रमुख कारण मुझे समझ में आ रहे हैं.  (1) विदेशों में भारत के छवि को नुकसान पहुंचाना (2) दुनिया के सबसे सुसंस्कृत और सभ्य हिंदू समाज को बदनाम करना (3) भारत को पांच ट्रिलियन डालर के अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को रोकना। इसलिए, हम समस्त हिंदू समाज ने यह निर्णय लिया है कि उन 49 शहरी नक्सलियों के जवाब में आपको आनलाइन पत्र लिखा जाए और आपको वस्तुस्थिति से अवगत करवाया जाए. हिंदूओं द्वारा कोई मॉब लिंचिंग नहीं हो रहा है बल्कि इसका फेक नैरेटिव बनाकर इसका खूब ढोल पीटा जा रहा है. जबकि, सच ये है कि मुसलमानों द्वारा प्लान कर पूरे देश में मॉब लिंचिंग किया जा रहा है जिसमें हिंदूओ को शिकार बनाया गया है उसी के आलोक में हम हिन्दू समाज कुछ आंकड़े इस पत्र में प्रस्तुत कर रहे हैं.... (1...

हर हिन्दू के दिल की आवाज

मैं हिंदू हूँ जब से मैंने होश संभाला है लगातार सुनता आ रहा हूँ कि बनिया कंजूस होता है, नाई चतुर होता है, ब्राह्मण धर्म के नाम पर सबको बेवकूफ बनाता है, यादव की बुद्धि कमजोर होती है, राजपूत अत्याचारी होते हैं, चमार गंदे होते हैं, जाट और गुर्ज्जर बेवजह लड़ने वाले होते हैं, मारवाड़ी लालची होते हैं... और ना जाने ऐसी कितनी असत्य परम ज्ञान की बातें सभी हिन्दुओं को आहिस्ते - आहिस्ते सिखाई गयी ! नतीजा हीन भावना, एक दूसरे की जाति पर शक और द्वेष धीरे- धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ और अंतिम परिणाम हुआ कि मजबूत, कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज आपस में ही लड़कर कमजोर होने लगा ! उनको उनका लक्ष्य प्राप्त हुआ ! हजारों साल से आप साथ थे...आपसे लड़ना मुश्किल था..अब आपको मिटाना आसान है ! आपको पूछना चाहिए था कि अत्याचारी राजपूतों ने सभी जातियों की रक्षा के लिए हमेशा अपना खून क्यों बहाया ? आपको पूछना था कि अगर चमार, दलित को ब्राह्मण इतना ही गन्दा समझते थे तो बाल्मीकि रामायण जो एक दलित ने लिखा उसकी सभी पूजा क्यों करते हैं ?माता सीता क्यों महृषि वाल्मीकि के आश्रम में रहती।  आपने नहीं ...