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साई का इतिहास- अवश्य पढ़ें

रानी को नहीं पकड़ पा रहे थे अंग्रेज, साई के अब्बू बहरुद्दीन ने की थी रानी से गद्दारी  बीरगति को प्राप्त हुई रानी लक्ष्मी बाई को मरवाने वाले गद्दारो के बारे  मे इतिहास लोगों मेंअब तक यही धारणा हे कि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई  अँगरेजों से लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुई थी और यह बात सत्य भी हे  परंतु कितने लोगों को पता है कि इस विरांगन को पकड़ना अँगरेजों के लिए  दुष्कर ही नहीं बल्कि असंभव था ।  सालों से अँगरेजों के नाकमें दम करने वाली रानी को पकड़ने के लिए जब  अंग्रेजों को कुछ उपाय नहीं सुझा तब उन्होंने पुराने तरीके आजमाए । यानी कि  किसी गद्दार सैनिक की खोज जो रानी की सेना में हो और रानी के बारे में  काफी कुछ जानता हो गद्दारों का इतिहास देखें तो सिर्फ दो नाम ऐसे हें  जिन्होंने भारत के इतिहास को बदल कर रख दिया था पहला गद्दार जयचंद था जो  हिन्दू साम्राज्य के विनाश का कारण बना । पृथ्वी राज चौहान अंतिम हिन्दू  राजा थे जिनके बादआठ सौ वर्षों तक मुस्लिमों ने शासन किया दूसरा गद्दार मीर  जाफर हुआ जो बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला क...

प्रसिद्ध आरती "ॐ जय जगदीश हरे" के रचयिता कौन❓

मैनें कुछ लोगों से पूछा कि क्या उन्हें पता है कि प्रसिद्ध आरती "ॐ जय जगदीश हरे" के रचयिता कौन हैं ? एक ने जवाब दिया कि हर आरती तो पौराणिक काल से गाई जाती है ! एक ने इस आरती को वेदों का एक भाग बताया ! और एक ने कहा कि सम्भवत: इसके रचयिता अभिनेता-निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार हैं! "ॐ जय जगदीश हरे", आरती आज हर हिन्दू घर में गाई जाती है! इस आरती की तर्ज पर अन्य देवी देवताओं की आरतियाँ बन चुकी है और गाई जाती है! परंतु इस मूल आरती के रचयिता के बारे में काफी कम लोगों को पता है! इस आरती के रचयिता थे पं. श्रद्धाराम शर्मा या श्रद्धाराम फिल्लौरी। पं. श्रद्धाराम शर्मा का जन्म पंजाब के जिले जालंधर में स्थित फिल्लौर शहर में हुआ था। वे सनातन धर्म प्रचारक, ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संगीतज्ञ तथा हिन्दी और पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे! उनका विवाह सिख महिला महताब कौर के साथ हुआ था। बचपन से ही उन्हें ज्यौतिष और साहित्य के विषय में गहरी रूचि थी। उन्होनें वैसे तो किसी प्रकार की शिक्षा हासिल नहीं की थी परंतु उन्होंने सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई...

🌹हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होने लगे 🌹

क्या कभी आपने सोचा है कि हिन्दुओं में रात्रि को विवाह क्यों होने लगे हैं, जबकि हिन्दुओं में रात में शुभकार्य करना अच्छा नहीं माना जाता है ? रात को देर तक जागना और सुबह को देर तक सोने को, राक्षसी प्रवृति बताया जाता है। रात में जागने वाले को निशाचर कहते हैं। केवल तंत्र सिद्धि करने वालों को ही रात्रि में हवन यज्ञ की अनुमति है। वैसे भी प्राचीन समय से ही सनातन धर्मी हिन्दू दिन के प्रकाश में ही शुभ कार्य करने के समर्थक रहे हैं। तब हिन्दुओं में रात की विवाह की परम्परा कैसे पड़ी ? कभी हम अपने पूर्वजों के सामने यह सवाल क्यों नहीं उठाते हैं  या  स्वयं इस प्रश्न का हल क्यों नहीं खोजते हैं ? दरअसल भारत में सभी उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संस्कार दिन में ही किये जाते थे। सीता और द्रौपदी का स्वयंवर भी दिन में ही हुआ था। शिव विवाह से लेकर संयोगिता स्वयंवर (बाद में पृथ्वीराज चौहान जी द्वारा संयोगिता जी की इच्छा से उनका अपहरण) आदि सभी शुभ कार्यक्रम दिन में ही होते थे। प्राचीन काल से लेकर मुगलों के आने तक भारत में विवाह दिन में ही हुआ करते थे। मुस्लिम  आक्रमणकारियों के भ...

राम

जय जय सीताराम जी, राम शब्द का अर्थ है - रमंति इति रामः जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता है वह  राम आखिर क्या हैं ?... राम जीवन का मंत्र है। राम मृत्यु का मंत्र नहीं है। राम गति का नाम है, राम थमने, ठहरने का नाम नहीं है। सतत वितानीं राम सृष्टि की निरंतरता का नाम है।  राम, महाकाल के अधिष्ठाता, संहारक, महामृत्युंजयी शिवजी के आराध्य हैं।  शिवजी काशी में मरते व्यक्ति को(मृत व्यक्ति को नहीं) राम नाम सुनाकर भवसागर से तार देते हैं। राम एक छोटा सा प्यारा शब्द है। यह महामंत्र - शब्द ठहराव व बिखराव, भ्रम और भटकाव तथा मद व मोह के समापन का नाम है। सर्वदा कल्याणकारी शिव के हृदयाकाश में सदा विराजित राम भारतीय लोक जीवन के कण-कण में रमे हैं।  श्रीराम हमारी आस्था और अस्मिता के सर्वोत्तम प्रतीक हैं। भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम हिंदुओं के आराध्य ईश हैं। दरअसल, राम भारतीय लोक जीवन में सर्वत्र, सर्वदा एवं प्रवाहमान महाऊर्जा का नाम है। वास्तव में राम अनादि ब्रह्म ही हैं। अनेकानेक संतों ने निर्गुण राम को अपने आराध्य रूप में प्रतिष्ठित कि...

अयोध्या के बाद काशी की बात क्यों❓

क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था? औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669, को बनारस के "काशी विश्वनाथ मंदिर" तोड़ने का आदेश जारी किया था.....जिसका पालन कर अगस्त 1669, को काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था...उस आदेश की कॉपी आज भी एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में सुरक्षित रखी हुयी है। अपने बाप को कैद करने और प्यास से तड़पाने वाले आतातयी तथा धर्माध मुग़ल शासक औरंगजेब ने हिन्दुओं के श्रद्धा और आस्था के केंद्र बनारस सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों के मंदिरों को अपने शासन काल में तोड़ने और हिन्दुओं को मानसिक रूप से पराजित करने के हरसंभव प्रयास किये.....औरंगजेब के गद्दी पर आते ही लोभ और बल प्रयोग द्वारा धर्मान्तरण ने भीषण रूप धारण किया था अप्रैल 1669 में चार हिन्दू कानूनगो बरखास्त किये गये...... जिन्हे मुसलमान हो जाने पर वापिस ले लिये गया.... औरंगजेब की घोषित नीति थी 'कानूनगो बशर्ते इस्लाम' अर्थात् मुसलमान बनने पर कानूनगोई... द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है... यह स्थान शिव ...

एक और सच

💐 दुनिया का सबसे छोटा संविधान चीन का है: कोई अपराधी बचता नहीं है. सबसे भारी भरकम संविधान भारत का है: कोई अपराधी फंसता नहीं है. 💐 सरकारी राशन के दुकान पर भीड़ देखिये। हाथ में 20000 का मोबाइल लेकर 70000 के बाइक पर बैठकर 2 रुपये किलो चावल लेने आते है ये गरीब लोग। 💐 जिस देश में नसबन्दी कराने वाले को सिर्फ़ 1500₹ मिलते हों और बच्चा पैदा होने पर 6000₹ मिलते हों तो जनसंख्या कैसे नियन्त्रित होगी😍 💐एक बादशाह ने गधों को क़तार में चलता देखा तो धोबी से पूछा, "ये कैसे सीधे चलते है..?" धोबी ने जवाब दिया, "जो लाइन तोड़ता है उसे मैं सज़ा देता हूँ, बस इसलिये ये सीधे चलते हैं।" बादशाह बोला, "मेरे मुल्क में अमन क़ायम कर सकते हो..?" धोबी ने हामी भर ली। धोबी शहर आया तो बादशाह ने उसे मुन्सिफ बना दिया, और एक चोर का मुक़दमा आ गया, धोबी ने कहा चोर का हाथ काट दो। जल्लाद ने वज़ीर की तरफ देखा और धोबी के कान में बोला, "ये वज़ीर साहब का ख़ास आदमी है।" धोबी ने दोबारा कहा इसका हाथ काट दो, तो वज़ीर ने सरगोशी की कि ये अपना आदमी है ख़याल करो। इस बार धोबी ने...

राम मंदिर पर एक टिप्पणी

आत्मगौरव का मंदिर ये पोस्ट है उन सेक्युलरिज़्म का एनाकोंडा पाले महानुभावों के लिए जो SC के अयोध्या निर्णय के बाद से जले भुने ये कमेंट कर रहे है के गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक हालात का क्या... जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद युद्ध में जापान का मनोबल पूरी तरह ध्वस्त हो गया.... जापान ने मित्रराष्ट्रों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया.. जापान अब एक युद्ध में बर्बाद देश था जिसके पास अपने मारे गए लोगों की सड़ती लाशों को सम्मान सहित अंतिम विदा देने की हैसियत तक न थी.... चारों तरफ हवाई हमलों में ध्वस्त इमारतें, बीमार घायलों की चीत्कारें, भूंख, मलवा और पाताल की गहराई तक गिरा मनोबल..... अमेरिकन और मित्रराष्ट्रों की सेना के कमांडर डगलस मेकआर्थर की दया पर जीता सांस लेता एक मुल्क जापान.... मित्रराष्ट्रों ने जापान को फिर खड़ा करने की योजनाएं बनाई जापानी भी पुनः अपने जीवन को जीने का प्रयत्न करने लगे लेकिन क्या टूटे मनोबल से कोई राष्ट्र कोई कौम जी सकती है.... सायद नहीं!! ऐसे में जापान के राजा हिरोहितो ने एक बेहद विवादित निर्णय लिया...... निर्णय था यासुकुनी श्राइन के पुनःनिर्म...